जानिए देश का पेट भरने वाला अन्नदाता(किसान) क्यों मजबूर है आत्महत्या करने को :-सुरेश वर्मा(कुंदनपुरा, हिसार)

बेचारा किसान
एक जमाना था जब कहते थे “जय जवान-जय किसान”।
लेकिन समय के साथ साथ किसान पिछड़ता जा रहा हैं। कारण जमीन का घटते जाना और महँगाई का बढ़ते जाना। आज किसान के खर्चे ज्यादा और आमदनी कम होती जा रही हैं।जिससे किसान आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाता हैं।एक तरफ तो सरकार उन्नत खेती-समृद्ध किसान का नारा दे रही हैं।और दूसरी तरफ उसी किसान का खून चूसने में लगी हैं, जैसे कि फसलों के दाम पूरे न मिलना,फसल बीमा जैसी स्कीमी योजना किसानों पर थोपना। अगर आज 2017-18 में नरमा फसल की बात करें तो आज रेट 4000/- से4500/- रुपये हैं। अगर एक एकड़ नरमा के खर्चे का अनुमान लगाए तो लगभग 30000/-रुपये हो जाता हैं।और कपास 6 से 8 किवंटल उतरती हैं।अब हिसाब लगा लो,क्या कमाया किसान ने?
8×4500=36000 — 30000=6000/-रुपये छमाही बचत।
वह भी कम से कम 3से4 लोगो की।
(नोट:–यह सिर्फ किसान की अपनी जमीन के हिसाब से बताया गया हैं। अगर जमीन ठेके पर ली गई हैं तो 30000/-से 40000/- रुपये खर्चा प्रति एकड़ ओर जोड़ दे)
दूसरी तरफ सरकार कह रही हैं कि खेती के साथ साथ दुग्ध पालन जैसा काम करे।अब बात करते हैं दुग्ध डेयरी की। जब किसान अपना दुध डेयरी में बेचता हैं, तब बिकता हैं फेंट और किलोग्राम के हिसाब से, लगभग 30/-से 35/- रुपये प्रति किलोग्राम(एवरेज)।
अब वहीं डेयरी वाला उस दूध को बेचता हैं तो बेचता हैं, लीटर के हिसाब से, 50/- रुपये प्रति लीटर। अब आप समझीये इस बात को कि खरीदते समय भी 100 ग्राम दुध की सरेआम ठगी।मतलब 1000ग्राम–900ग्राम= 100ग्राम, यानि कि 100ग्राम×30=3000 ग्राम( 3 किलो) प्रति किलोग्राम के हिसाब से सारे आम चोरी।
अब किसान बचत का अनुमान लगा कर देखे प्रतिदिन 4 किलोग्राम सुबह, 4 किलोग्राम शाम को 30/- रुपये प्रति किलो दुध बेचा, 30×8=240 रुपये प्रतिदिन। महीने भर में 240×30=7200/- से 8000/- रुपये लगभग। अब खर्चे की बात करे तो 4 बोरी बिनोला×1300 = 5200 रुपये प्रति महिना। तूड़ी, ज्वार,हरा चारा,चुरी व कैल्शियम रह गयी, वो अलग। अब आप ही बताओ किसान आत्महत्या ना करे तो क्या करें।
जब मतदान के समय सरकार किसानों के पास जाती हैं, तब वादे बड़े बड़े होते हैं, जैसे फसलो के दाम बढ़ेगे, डीजल सस्ता मिलेगा, काम ब्याज पर कर्ज भी मिलेगा इत्यादि। पूरे किन के होते हैं, उन साहूकारों के,उद्योगपतियो के, बड़े बड़े व्यापारियों के। कारण उन्होंने उस विधायक को, संसद को,मुख्यमंत्री को पैसों से तोल दिया था,नोटों के हार पहनाये थे।किसान तो बेचारा सिर्फ विचार सुनने के लिए भीड़ का हिस्सा बना था। अगर किसान इसी तरह कर्ज में डूबता रहा और मौत को गले लगाता रहा तो ना ये व्यापारी रहेंगे और ना ये सरकार रहेगी। अतः किसानों का शोषण बंद करो, इसे भी जीने का अधिकार है।
आपका अपना
दुःखी किसान
……………………………

लेखक
सुरेश कुमार वर्मा कुन्दनपुरा (हिसार) हरियाणा M.No. 8059591525

 

Leave a Reply