अपनी काबलियत को पहचानो(प्रेरणादायक कहानी):-सुरेश वर्मा

अपनी काबलियत को पहचानो
एक बार एक चील आकाश में उड़ राशि थी, जोकि पेट से गर्भवती थी। अचानक उसे पीड़ा होने लगी और उसका अंडा मुर्गियों के बाड़े में जा गिरा। जब मुर्गी ने वो अंडा देखा तो आश्चर्य हुआ लेकिन मन मे ममता उमड़ गयी, चाहे अंडा किसी का भी हो, वह उसको सहेगी। कुछ समय बाद उस अंडे में से एक चूजा निकला। अब वह चूजा बाकी चूजों के साथ खेलता,उन्ही के साथ दाना चुगता,और दिन भर उन्ही की तरह चू चू करता रहता।
अब एक दिन चील ने देखा कि चील का बच्चा वो भी मुर्गियों के बच्चों के साथ। चील अचानक नीचे आयी और झपटा मारा और उस चील के बच्चें को पकड़ कर कहा, देख तू चील का बच्चा है, मेरे साथ चल। चील के बच्चे ने कहा नहीं में तो मुर्गी का बच्चा हूँ, इन्ही के साथ रहता हूँ, इन्हीं के साथ खाता हूं, नहीं नहीं में तो मुर्गी का बच्चा हूं।
अब चील परेशान होकर एक समझदार चील के पास गई और पुरी घटना सुना डाली। समझदार चील ने कहा अब तू दोबारा जा और जोर का झपटा मारकर दूर आसमान में लेजाकर छोड़ देना। अगर वो चील का बच्चा होगा तो उड़ जायेगा, अगर मुर्गी का बच्चा होगा तो नीचे गिरकर मर जायेगा।
अब चील ने ऐसा ही किया झपटा मारा और उस बच्चे को आसमान में लेजाकर छोड़ दिया। जैसे ही बच्चा नीचे गिरने लगा, डर के मारे पंख मारने लग गया और चील के साथ उड़ने लगा।और अपने असली जीवन को पहचान कर आनन्द लेने लगा।

शिक्षा:–हम लोग भी उस चूजे की तरह अपनी काबलियत को नहीं पहचान पाते और घुट घुट कर इसी जीवन को अपना लेते हैं।अपनी सोच बदलिये और आगे बढ़ कर जीवन का आनन्द लीजिये।
सुरेश कुमार वर्मा  कुन्दनपुरा( हिसार )

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