सावधान!खाना खाते ही पानी पीना जहर समान है(जरूर पढ़ें व शेयर करें):-राजिव दीक्षित

खाना खाते ही तुरंत पानी पीना जहर के समान है:-राजिव दीक्षित

निरोगी और स्वस्थ होने के लिए आयुर्वेद की एक छोटी सी जानकारी आप सब लोगों से शेयर करना चाहता हूँ।

आयुर्वेद में ये कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन मे निरोगी होना है,रोग मुक्त होना है तो अपने जीवन मे तीन बातो का ध्यान रखे अपना(वात, पित्त, कफ)तीनों का संतुलन बनाएं रखें।

तीन तरह के दोष है हमारे शरीर में आपने सूना भी होगा की त्रिदोष आधारित शरीर है हमारा।

जब वात बहुत बिगड़ जाता है तो 80 से ज्यादा रोग हमारे शरीर में आते है।जब पित्त बहुत बिगड़ जाता है तो लगभग 46 से 50 रोग आते है।और

जब कफ बहुत बिगड़ जाता है तो 28 रोग आते है।और जब वात ,पित्त, कफ तीनों ही बिगड़ जाएं तो 148 रोग आते है,

सर्दी- जुखाम से लेकर कैंसर तक जो कि आख़री रोग माना जाता है कैंसर तक,ये सब वात ,पित्त, कफ के बिगड़ने का खेल है।

इस देश के आयुर्वेद चिकित्सा के कुछ सबसे महान लोगों के नाम मे से कुछ नाम आप जानते है जैसे चरक ऋषि,सुश्रुत ऋषि और भी ऐसे महान ऋषि हुये उनमें है वागभट्ट ऋषि।

वागभट्ट ऋषि ने एक पुस्तक लिखी उसका नाम है अष्टांगहिर्दयम और एक पुस्तक लिखी आष्टांग संग्रहम इन दोनों पुस्तकों में उन्होंने 7,000 नियम बताएं है।

उनमें से एक नियम बताता हूँ अच्छा लगे तो आज से ही पालन करे और दूसरों को भी बताए ताकि इस नियम का पालन करके स्वस्थ रह सके।

तो ये नियम है वात, पित्त, कफ को संतुलित रखने के लिए।

अब आपके वात,पित्त, कफ सब एक साथ सन्तुलित रहे तो उसके लिए येे नियम है!

खाना खाने के तुरुन्त बाद कभी भी पानी न पीजिए।।

ये नियम है तो आप बोलोगे की ये तो बहुत बड़ी मुश्किल बात है।

हम तो खाना खाते ही पानी पीते है ।

हम तो सब के सब बिना पानी पियें खाना ही नही खाते है।आप मे कई लोग तो खाने से ज्यादा पानी पीते है ,खाना कम खाते है और पानी ज्यादा पीते है।

खाना खाने के तुरन्त बाद कभी भी पानी मत पीना क्योंकि महऋषि वागभट्ट जी कहते है कि:-

भोजनान्ते विषम वारि -मानो भोजन के अंत मे पानी पियें  तो वो जहर समान है।  

इसलिए वो कहते है कि भोजन के अंत मे कभी भी पानी न पीयें।

तो आप पूछोगे की क्यो न पियें कारण बता दो।कारण में बताना चाहता हूं सरल भाषा में :-

जब हम भोजन खाते है वो सारा खाना पेट मे इकट्ठा होता है।पेट मे स्थान होता है ,उसको हम कहते है जठर संस्कृत मे और

हिंदी मे भी

जठर और अमाशय कहते है ।

जठर एक छोटा सा स्थान होता है।आपके पेट मे नाभि है ना उसके लेफ्ट साइड में बाई तरफ छोटा सा स्थान है।सारा खाना जो भी हम खाते है सब्जी,रोटी,दाल,चावल,दही सब कुछ जठर में आता है। तो उसमें आग जलती रहती है उस आग को कहते है जठराग्नि।

अब जठर में जैसे ही खाना इकट्ठा होता है तभी जठर अग्नि शुरू हो जाती है खाने का पहला ग्रास खाते ही यही जठराग्नि ही खाने को पचाने का काम करती है और ये जठराग्नि खाने को वैसे ही पचाती है जैसे रसोईघर की अग्नि खाने को पकाती है।

आप अपने रसोई घर मे अग्नि जलाओ उस पर दूध रख दो दूध में चावल डाल दो।अग्नि जब तक जलती रहेगी खीर तब तक बनती रहेगी।

आप घर मे अग्नि जलाओ उसके उपर पानी रख दो।उसमे दाल डाल दो ।

दाल के पकने की क्रिया तब तक चलेगी जब तक अग्नि जलेगी।ऐसे ही पेट मे होता है।जैसे ही आप ने खाना खाया।पेट मे अग्नि जलती है।

जब तक अग्नि जलती है तब तक खाने के पचने की क्रिया चलती है।जैसे रसोई घर मे खाना पकाते है ।वैसे ही पेट मे खाना पकता है।इसी को हम खाना पचाने की क्रिया कहते है।

इसी को अंग्रेजी में Digestion कहते है।तो आप ने खाना खाया पेट मे अग्नि जल गई ।अब वो खाने को हजम करेगी,खाने को पचायेगी।मुझे आप एक प्रश्न का उत्तर दो आप जैसे आप ने खाना खाया और पेट मे जठराग्नि जल गई वो खाने को पचाने का काम कर रही है।तभी आप ने घट-घट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया बर्फ मिलाया हुआ पानी पी लिया,फ्रिज का पानी पी लिया।

क्या होने वाला है अग्नि जलेगी या बुझेगी।

अग्नि के ऊपर पानी डालो तो पानी और अग्नि की दोस्ती नही है दुश्मनी है।

पानी अग्नि को बुझा देता है। आप ने खाना खाया पेट मे जठराग्नि जली और पीछे से गट-गट पानी पी लिया अब अग्नि शांत हो गई अब खाना पचेगा नही पेट मे पड़ा-पड़ा सड़ेगा और सड़ा हुआ खाना सौ से ज्यादा विष पैदा करेगा।और ये सौ विष आप की जिन्दगी को नरक बना देंगे और जिन्दगी भर आप बीमार पड़े रहोगे।

आप को मालूम है कई लोग कहते है कि मुझे पेट मे गैस 

बहुत बनती है।

ये गैस उन्ही को बनती है।जिनका खाना हजम नही होता।कई लोग कहते है हमे पेट मे जलन होती है ये जलन उन्ही को होती है जिनका खाना पचता नही।

कोई कहता है मेरे पेट मे एक दम से गुम हो जाता है फूल जाता है।

ये वो लक्षण है जब खाना पचता नही जब खाना सड़ेगा तो विष पैदा करेगा और वो विष आप को बीमार करेगे।इसलिए महर्षि वागभट्ट जी ने कहा है कि खाना खाते ही कभी भी पानी मत पीओ।

तो आप बोलोगे की कितनी देर तक नही पियें।कम से कम

एक घण्टे तक ।

एक घण्टे बाद पानी पियें।आप बोलोगे की एक घण्टा क्यो ? इसका कारण ये है कि ये जो पेट मे जठराग्नि जलने की क्रिया है ये लगभग एक घण्टे ही चलती है पेट मे।

उसके बाद अग्नि अपने आप शांत हो जाती है उसके बाद पानी पी लो।

जैसे खाना यदि 10 बजे खाना खाया है तो पानी 11 बजे पियो और जैसे खाना 11 बजे खाया है तो पानी 12 बजे पियों तो आप कर मन मे एक सवाल आएगा कि क्या खाना खाने से पहले पानी पी ले क्या ?हाँ पी लो 40 मिनट पहले पेट भर कर पानी पी लो।ध्यान रहे खाना खाने से पहले जब भी पानी पीना हो तो 40 मिनट पहले पियें ।

आप एक सवाल और भी पूँछ सकते हो कि अच्छा ठीक है।खाना खाने के बाद पानी तो नही पीयेंगे तो कुछ और पी सकते है क्या पानी को छोड़कर तो उसके लिए वागभट्ट जी कहते है कि खाने के तुरन्त बाद लस्सी पीओ ,मट्ठा पीओ,खाने के तुरंत बाद पीना है तो फलों का रस पीओ। गन्ने का रस,

मौसमी,सन्तरे,

अनार पीओ।

आप कहोगे महंगे महंगे रस बता रहे हो पैसे तो है नही तो आप नीबू का ही रस पिलो।शिकंजी बनाकर पी लो। सबसे सस्ता है तो खाने के तुरन्त बाद दही की लस्सी पीओ फलों का रस पी सकते हो और तीसरी चीज दूध पी सकते हो खाने के तुरंत बाद कुछ पीना है तो दही की लस्सी या मट्ठा, फलों का रस या दूध और

पानी पीना हो तो एक घण्टे बाद पीओ।

एक बात ध्यान रखें तो अच्छा है । सवेरे जो खाना खाते है जिसको हम नाश्ता कहते है तो सुबह खाने के बाद फलों का रस पीना अच्छा है दोपहर को खाना खाये तो लस्सी और मठ्ठा पीना अच्छा है और रात का खाना खाये तो दूध पीना अच्छा है।

जो लोग इस नियम का पालन कर सकतें है।जिंदगी में 80 रोग उनको नही हो सकते ।।

वात, पित्त,कफ तीनों ही इस छोटे से नियम से सन्तुलित रहते है।

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आप का अपना

डॉ. राजीव दीक्षित

 

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